Eduphoria - An International Multidisciplinary Magazine

Vol.04, Issue 03 (Jul-Sep 2026)

An International scholarly/ academic magazine, peer-reviewed/ refereed magazine, ISSN : 2960-0014

पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा: अरुणाचल प्रदेश के विशेष संदर्भ में एक सामरिक एवं भू-राजनीतिक समीक्षा Security of Northeast India: A Strategic and Geopolitical Review with Special Reference to Arunachal Pradesh

डॉ. रिंकू

सहायक प्रोफेसर, रक्षा अध्ययन (Defence Studies), ज्योतिबा फुले राजकीय महाविद्यालय, रादौर, यमुनानगर

Dr. Rinku

Assistant Professor of Defence Studies, Jyotiba Phule Govt. College, Radaur, Yamuna Nagar

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, जातीय-सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक संसाधनों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला रणनीतिक द्वार भी है। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों में अरुणाचल प्रदेश का स्थान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक का प्रतिनिधित्व करता है और चीन (तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र), भूटान तथा म्यांमार के साथ सीमा साझा करता है। इसकी सामरिक स्थिति भारत-चीन संबंधों, सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। अरुणाचल प्रदेश लंबे समय से भारत और चीन के मध्य सीमा विवाद का केंद्र रहा है। चीन द्वारा इस क्षेत्र पर “दक्षिण तिब्बत” के रूप में दावा करना, वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control-LAC) पर सैन्य तनाव, सीमा क्षेत्रों में अवसंरचनात्मक प्रतिस्पर्धा तथा सूचना युद्ध जैसी चुनौतियाँ राज्य की सुरक्षा को जटिल बनाती हैं। इसके अतिरिक्त दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ, सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन, आर्थिक पिछड़ापन, संचार सुविधाओं की कमी तथा अवैध गतिविधियाँ भी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। यह शोध-पत्र उपलब्ध साहित्य, सरकारी दस्तावेजों, रक्षा एवं सामरिक अध्ययनों तथा नीति रिपोर्टों के आधार पर अरुणाचल प्रदेश की सुरक्षा स्थिति का विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य केवल सैन्य सुरक्षा तक सीमित न होकर मानव सुरक्षा, सीमा विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा कूटनीतिक रणनीतियों को भी समझना है।

प्रमुखशब्द (Keywords): पूर्वोत्तर भारत, अरुणाचल प्रदेश, राष्ट्रीय सुरक्षा, भारत-चीन सीमा विवाद, वास्तविक नियंत्रण रेखा, सीमा प्रबंधन, सामरिक अध्ययन, भू-राजनीति।

The Northeast region of India holds extreme importance from a national security perspective due to its unique geographical location, ethno-cultural diversity, natural resources, and international borders. This region also serves as a strategic gateway connecting India to Southeast Asia. Among the eight states of the Northeast, Arunachal Pradesh holds a particularly significant position as it represents one of India’s longest international borders, sharing boundaries with China (Tibet Autonomous Region), Bhutan, and Myanmar. Its strategic location directly impacts India-China relations, border management, regional stability, and national security policy.

Arunachal Pradesh has long been the centerpiece of the border dispute between India and China. Challenges such as China’s claim over this region as “South Tibet,” military tension along the Line of Actual Control (LAC), infrastructural competition in border areas, and information warfare complicate the state’s security. Additionally, difficult geographical conditions, migration from border areas, economic backwardness, lack of communication facilities, and illegal activities also affect the security framework.

This research paper presents an analytical study of the security situation in Arunachal Pradesh based on available literature, government documents, defence and strategic studies, and policy reports. The objective of the study goes beyond military security to encompass human security, border development, the participation of local communities, and diplomatic strategies.

Keywords: Northeast India, Arunachal Pradesh, National Security, India-China Border Dispute, Line of Actual Control, Border Management, Strategic Studies, Geopolitics.

Dr Rinku has completed Ph.D. in Defence Studies from Barkatullah University, Bhopal (M.P.) in 2019, qualified NET in Defence Studies and serving the community as Assistant Professor in Department of Defence Studies, Jyotiba Phule Govt. College, Radaur Yamuna Nagar Haryana. She is NSS Officer and awarded with “Appreciation Certificate” by Sub Divisional Magistrate, Government of Haryana for outstanding work as a NSS Programme Officer on 26 January 2022. She is life member at International Council for Education Research and Training (ICERT) and Life Member of M.D. University Alumni Association, Rohtak. She has presented 30 research papers in National and International Conferences, and published 25 research papers in various journals.

This research paper underscores the vital geopolitical and strategic significance of Arunachal Pradesh within the broader framework of India’s national security and regional diplomacy. By critically examining the multidimensional security matrix—ranging from India-China border tensions along the Line of Actual Control (LAC) and Chinese territorial claims to internal socio-economic challenges—the study bridges conventional military strategy with modern concepts of human security and border development. The paper offers actionable insights for policymakers, defence analysts, and security strategists advocating for a holistic approach to national security. It highlights the necessity of robust border infrastructure, community-led local defense, proactive diplomacy, and regional integration to secure India’s northeastern frontier. Furthermore, by framing Arunachal Pradesh as a strategic gateway to Southeast Asia, this work advances discourse on India’s “Act East” policy, demonstrating that internal security, local empowerment, and geopolitical stability are inextricably linked.

APA Style (7th Edition)

Rinku. (2026). पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा: अरुणाचल प्रदेश के विशेष संदर्भ में एक सामरिक एवं भू-राजनीतिक समीक्षा [Security of Northeast India: A strategic and geopolitical review with special reference to Arunachal Pradesh]. EDUPHORIA – An International Multidisciplinary Magazine, 4(3), 6–11. https://doi.org/10.59231/EDUPHORIA/230486

Chicago Style (17th Edition)

Rinku. “पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा: अरुणाचल प्रदेश के विशेष संदर्भ में एक सामरिक एवं भू-राजनीतिक समीक्षा” [Security of Northeast India: A Strategic and Geopolitical Review with Special Reference to Arunachal Pradesh]. EDUPHORIA – An International Multidisciplinary Magazine 4, no. 3 (2026): 6–11. https://doi.org/10.59231/EDUPHORIA/230486.

MLA Style (9th Edition)

Rinku. “पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा: अरुणाचल प्रदेश के विशेष संदर्भ में एक सामरिक एवं भू-राजनीतिक समीक्षा.” EDUPHORIA – An International Multidisciplinary Magazine, vol. 4, no. 3, 2026, pp. 6–11. https://doi.org/10.59231/EDUPHORIA/230486.

Page Numbers: 06–11

DOI: https://doi.org/10.59231/eduphoria/230486

Published: Jul 01, 2026

Subject: Defence and Strategic Studies, International Relations & Geopolitics

Thematic Classification: National Security Policy, Border Security & Management, Regional Studies (South Asia & Indo-Pacific), Geopolitics & Bilateral Relations, Comprehensive Security & Human Security, Infrastructure & Strategic Connectivity, Information Warfare & Non-Traditional Security

प्रस्तावना (Introduction)

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र लगभग 2.6 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और भारत के शेष भाग से केवल लगभग 22 किलोमीटर चौड़े सिलीगुड़ी कॉरिडोर द्वारा जुड़ा हुआ है, जिसे सामान्यतः “चिकन नेक” कहा जाता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की सुरक्षा व्यवस्था में विशेष स्थान रखता है।

अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा राज्य है और क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। इसकी लगभग 1,680 किलोमीटर लंबी सीमा चीन, भूटान और म्यांमार से लगती है। राज्य की भौगोलिक संरचना पर्वतीय, दुर्गम और सीमित परिवहन सुविधाओं वाली है, जिसके कारण सुरक्षा प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन जाता है।

भारत-चीन सीमा विवाद में अरुणाचल प्रदेश सबसे संवेदनशील क्षेत्र है। 1962 के भारत-चीन युद्ध का प्रमुख क्षेत्र यही था। वर्तमान समय में भी तवांग क्षेत्र, दिबांग घाटी, अंजॉ और अन्य सीमावर्ती क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों पर दावा करना और सीमा क्षेत्रों में सैन्य एवं नागरिक अवसंरचना का विस्तार भारत के लिए सुरक्षा चुनौती प्रस्तुत करता है।

हालांकि, सुरक्षा की अवधारणा अब केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है। आधुनिक सुरक्षा अध्ययन में मानव सुरक्षा, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए अरुणाचल प्रदेश की सुरक्षा का अध्ययन व्यापक दृष्टिकोण से किया जाना आवश्यक है।

अध्ययन का औचित्य (Rationale of the Study)

अरुणाचल प्रदेश की सुरक्षा का अध्ययन निम्न कारणों से महत्वपूर्ण है—

  1. यह क्षेत्र भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा का प्रमुख केंद्र है।
  2. भारत-चीन सीमा विवाद का सबसे संवेदनशील भाग अरुणाचल प्रदेश है।
  3. पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” का प्रवेश द्वार है।
  4. प्राकृतिक संसाधनों और जल संसाधनों की दृष्टि से यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है।
  5. सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली जनजातीय आबादी राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  6. क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा के बीच गहरा संबंध है।

अध्ययन के उद्देश्य (Objectives)

इस अध्ययन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  1. पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा स्थिति का अध्ययन करना।
  2. अरुणाचल प्रदेश के सामरिक महत्व का विश्लेषण करना।
  3. भारत-चीन सीमा विवाद के प्रभावों का अध्ययन करना।
  4. राज्य में मौजूद पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों की पहचान करना।
  5. सीमा अवसंरचना विकास और सरकारी नीतियों का मूल्यांकन करना।
  6. भविष्य के लिए प्रभावी सुरक्षा रणनीतियों का सुझाव देना।

परिकल्पना (Hypothesis)

इस अध्ययन की मुख्य परिकल्पना है—

“अरुणाचल प्रदेश की दीर्घकालीन सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति से सुनिश्चित नहीं की जा सकती, बल्कि सीमा विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, आर्थिक प्रगति और तकनीकी क्षमता के समन्वय से ही प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।”

विस्तृत साहित्य समीक्षा (Literature Review)

भारतीय विद्वानों के अध्ययन

भारतीय सामरिक विशेषज्ञों ने पूर्वोत्तर भारत को भारत की सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण भाग माना है। कई अध्ययनों में यह बताया गया है कि सीमा क्षेत्रों में विकास की कमी सुरक्षा जोखिमों को बढ़ाती है।

विदेशी विद्वानों के अध्ययन

विदेशी अध्ययनों में भारत-चीन सीमा विवाद को एशियाई शक्ति संतुलन के संदर्भ में देखा गया है। चीन की क्षेत्रीय रणनीति और भारत की सुरक्षा प्रतिक्रिया पर अनेक अध्ययन उपलब्ध हैं।

 रक्षा एवं सामरिक अध्ययन

IDSA, ICWA और ORF जैसे संस्थानों के अध्ययनों में अरुणाचल प्रदेश को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का महत्वपूर्ण भाग बताया गया है।

 सरकारी रिपोर्टों का विश्लेषण

गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की रिपोर्टों से स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर में सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता आवश्यक है।

शोधअंतर (Research Gap)

अधिकांश अध्ययन सैन्य सुरक्षा पर केंद्रित हैं, जबकि मानव सुरक्षा, स्थानीय समुदायों की भूमिका और विकास-सुरक्षा संबंध पर अपेक्षाकृत कम अध्ययन उपलब्ध हैं।

शोध पद्धति (Research Methodology)

यह अध्ययन गुणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है।

 शोध का स्वरूप

यह एक समीक्षा आधारित शोध (Review Research) है जिसमें द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है।

 डेटा स्रोत

  • सरकारी रिपोर्ट
  • रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज
  • गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट
  • संसदीय समिति रिपोर्ट
  • शोध पत्र
  • पुस्तकें
  • सामरिक संस्थानों की रिपोर्ट

विश्लेषण पद्धति

विषयवस्तु विश्लेषण (Content Analysis) के माध्यम से सुरक्षा संबंधी मुद्दों का अध्ययन किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत का सामरिक महत्व

पूर्वोत्तर भारत भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। आठ राज्यों से मिलकर बना यह क्षेत्र भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला रणनीतिक प्रवेश-द्वार है। एक्ट ईस्ट नीति के अंतर्गत म्यांमार, थाईलैंड और अन्य ASEAN देशों के साथ संपर्क बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान बहु-माध्यम परियोजना जैसी पहलें क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत कर रही हैं।

भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर भारत चीन (तिब्बत), म्यांमार, भूटान और बांग्लादेश से सीमा साझा करता है, जिससे इसका सामरिक महत्व बढ़ जाता है। विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश से लगी भारत–चीन सीमा (LAC) सीमा विवाद और सुरक्षा चुनौतियों का प्रमुख केंद्र है। सीमा अवसंरचना, सैन्य तैनाती, सीमा-पार अपराध और उग्रवादी गतिविधियाँ इस क्षेत्र की प्रमुख सुरक्षा चिंताएँ हैं।

यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भी समृद्ध है। तेल, प्राकृतिक गैस, कोयला, जलविद्युत क्षमता, बाँस और जैव विविधता जैसे संसाधन आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली के कारण यहाँ जलविद्युत उत्पादन की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।

सरकार द्वारा सड़क, रेल, हवाई संपर्क, सीमा सड़क संगठन (BRO) की परियोजनाओं और डिजिटल नेटवर्क के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीमा क्षेत्रों में बेहतर अवसंरचना न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करती है, बल्कि स्थानीय विकास और क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देती है। इस प्रकार पूर्वोत्तर भारत राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण आधार है।

अरुणाचल प्रदेश का भूराजनीतिक महत्व

अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सीमावर्ती राज्य है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति में विशेष स्थान रखता है। यह राज्य चीन, भूटान और म्यांमार की सीमाओं से जुड़ा हुआ है, जिससे इसकी सामरिक महत्ता और बढ़ जाती है। विशेष रूप से चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) इसे भारत-चीन संबंधों का एक संवेदनशील क्षेत्र बनाती है। तवांग क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से तिब्बती बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का भारत में प्रवेश अरुणाचल प्रदेश से होता है, जिससे यह जल संसाधनों और पर्यावरणीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन जाता है। साथ ही, यह राज्य भारत की पूर्वी रक्षा व्यवस्था का प्रमुख आधार है, जहाँ सीमावर्ती अवसंरचना, सैन्य तैनाती तथा सीमा प्रबंधन को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। इन सभी कारणों से अरुणाचल प्रदेश भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भू-राजनीतिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

 भारतचीन सीमा विवाद एवं LAC

भारत और चीन के मध्य लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा विवादित है। अरुणाचल प्रदेश में विशेष रूप से तवांग क्षेत्र विवाद का केंद्र रहा है।चीन अरुणाचल प्रदेश पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार पर दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। LAC पर समय-समय पर तनाव की घटनाएँ दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करती रही हैं।

सीमा अवसंरचना विकास

सीमा सड़क संगठन (BRO): BRO द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और पुल निर्माण किया जा रहा है जिससे सेना की गतिशीलता बढ़ी है।

सड़क एवं पुल विकास: सीमा क्षेत्रों में ऑल वेदर रोड, पुल और सुरंगों का निर्माण सुरक्षा क्षमता को मजबूत करता है।

एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड: अरुणाचल प्रदेश में हवाई पट्टियों के विकास से सैन्य एवं आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ी है।

डिजिटल निगरानी: ड्रोन, सैटेलाइट निगरानी, सेंसर और आधुनिक संचार प्रणाली सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

सुरक्षा चुनौतियाँ

अरुणाचल प्रदेश अनेक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें सबसे प्रमुख भारत-चीन सीमा विवाद है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर समय-समय पर उत्पन्न होने वाला तनाव और चीन द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तथा नागरिक अवसंरचना का तीव्र विकास भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य में साइबर हमले, सूचना युद्ध तथा डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियाँ भी लगातार बढ़ रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों से जनसंख्या का पलायन सीमा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में मानव उपस्थिति कम होती है। साथ ही, तस्करी, अवैध व्यापार तथा अन्य सीमा-पार गतिविधियाँ भी कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सैन्य तैयारी के साथ-साथ मजबूत सीमा प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास की आवश्यकता है।

भारत सरकार की नीतियाँ

अरुणाचल प्रदेश एवं पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए भारत सरकार ने अनेक रणनीतिक एवं विकासोन्मुखी नीतियाँ अपनाई हैं। एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से व्यापार, संपर्क और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से जोड़ना है। इसी प्रकार, वाइब्रेंट विलेजेज़ कार्यक्रम (Vibrant Villages Programme) के अंतर्गत सीमावर्ती गाँवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, रोजगार के अवसरों का सृजन तथा स्थानीय जनसंख्या को स्थायी रूप से बसाए रखने पर विशेष बल दिया जा रहा है। सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार सड़क, पुल, सुरंग और अन्य अवसंरचनाओं का निर्माण कर रही है, साथ ही सीमा निगरानी प्रणाली और सुरक्षा बलों की क्षमता का भी निरंतर विस्तार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, रक्षा आधुनिकीकरण के तहत आधुनिक हथियारों, उन्नत निगरानी तकनीकों, ड्रोन, संचार प्रणालियों तथा सैन्य अवसंरचना का विकास किया जा रहा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की रक्षा क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली अधिक प्रभावी बन सके।

परिणाम एवं विश्लेषण (Results and Analysis)

अध्ययन से स्पष्ट होता है कि—

  1. अरुणाचल प्रदेश भारत की सुरक्षा नीति का केंद्रीय क्षेत्र है।
  2. सीमा विकास और सैन्य क्षमता में वृद्धि हुई है।
  3. स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
  4. विकास और सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं।
  5. चीन की रणनीतिक गतिविधियों के कारण निरंतर सतर्कता आवश्यक है।

नीतिगत सुझाव (Policy Suggestions)

  1. सीमा क्षेत्रों में तेज आर्थिक विकास किया जाए।
  2. स्थानीय युवाओं को सुरक्षा एवं विकास कार्यक्रमों में शामिल किया जाए।
  3. सड़क और संचार नेटवर्क को और मजबूत किया जाए।
  4. साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ाई जाए।
  5. भारत-चीन सीमा प्रबंधन के लिए कूटनीतिक संवाद जारी रखा जाए।
  6. सीमावर्ती गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ाई जाएँ।

निष्कर्ष (Conclusion)

अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि अरुणाचल प्रदेश की सुरक्षा के लिए सैन्य क्षमता के साथ-साथ सीमा अवसंरचना, आर्थिक विकास, स्थानीय जनभागीदारी, तकनीकी निगरानी और प्रभावी कूटनीतिक नीति का समन्वय आवश्यक है। भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई विभिन्न योजनाएँ जैसे एक्ट ईस्ट नीति, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, सीमा सड़क विकास तथा रक्षा आधुनिकीकरण इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।अरुणाचल प्रदेश भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण आधार है। इसकी सुरक्षा केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं बल्कि व्यापक मानव सुरक्षा दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। भारत-चीन सीमा विवाद, भौगोलिक कठिनाइयाँ और विकास संबंधी चुनौतियाँ इस क्षेत्र को संवेदनशील बनाती हैं।

भारत सरकार द्वारा सीमा अवसंरचना, रक्षा आधुनिकीकरण और सीमावर्ती विकास योजनाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। भविष्य में एक प्रभावी सुरक्षा नीति के लिए सैन्य शक्ति, आर्थिक विकास, स्थानीय भागीदारी और कूटनीतिक संतुलन का समन्वय आवश्यक होगा।

Statements & Declarations

Author’s Contribution: Dr. Rinku is the sole author of this study. The author was responsible for the conceptualization and design of the research framework regarding national security and geopolitical strategy in Northeast India with a focus on Arunachal Pradesh. The author conducted the qualitative secondary literature review and content analysis of defense documents, evaluated border infrastructure initiatives (including the Act East Policy and Vibrant Villages Programme), synthesized findings, and drafted the final manuscript.

Peer Review: This article has undergone a double-blind peer-review process organized by the Editorial Board of EDUPHORIA – An International Multidisciplinary Magazine. The review validated the methodology, content analysis of strategic defense literature, and findings regarding India–China border dynamics and regional security.

Competing Interests: The author declares no financial, personal, or institutional conflicts of interest that could influence the integrity of the research or the reported findings.

Funding: This research was conducted using personal and institutional resources from Jyotiba Phule Government College, Radaur, Yamunanagar. No external grants or financial support from commercial or non-profit sectors were received.

Data Availability: The research is based on secondary literature, publicly accessible government reports, Ministry of Defence annual reports, and published academic articles. All secondary sources utilized are cited within the references section.

Ethical Approval: This review-based paper relies exclusively on publicly available policy documents, scholarly literature, and published data. No primary human subjects, confidential personal data, or animal testing were involved, and formal institutional ethics approval was not required.

License Statement: This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International (CC BY-NC-ND 4.0) License. Published by ICERT.

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